डॉ सुशील कुमार M.V.Sc, BASU, Patna 800014

  • मुनाफा के ख्याल से बकरी-पालन व्यवसाय करने वालों को उन्नत नस्ल की बकरियों का चुनाव करना होगा।
  • इसके लिए उन्हे उन्नत नस्ल की प्रमुख भारतीय बकरियों के संबंध में थोड़ी बहुत जानकारी हासिल कर लेनी चाहिए।
  • भारतवर्ष में जमनापारी, बीटल, बरबेरी, कच्छी, उस्मानावादी, ब्लैक बंगाल, सुरती, मालवारी तथा गुजराती आदि विभिन्न नस्लों की बकरियाँ पैदावार के ख्याल से अच्छी नस्ल की समझी जाती है।
  • पहाड़ी क्षेत्रों में कुछ ऐसी भी बकरियाँ पाई जाती है, जिनके बालों से अच्छे किमिति कपड़े बनाये जाते हैं, लेकिन उपर्युक्त सभी नस्लों में दूध मांस और खाद्य उत्पादन के लिए जमनापारी, बीटल और बरबेरी बकरियों काफी उपयोगी साबित हुई है।
  • इन तीनों नस्लों में भी जमनापारी नस्ल की बकरियाँ बिहार की जलवायु में अच्छी तरह से पनप सकती ।
  1. ब्लैकबंगाल
  • ब्लैक बंगाल बकरी की एक नस्ल है आमतौर पर काले रंग की होती है, यह भूरे, सफेद या भूरे रंग में भी पाई जाती है।
  • बांग्लादेश , पश्चिम बंगाल , बिहार , असम , और ओडिशा में पाई जाती।
  • ब्लैक बंगाल बकरी आकार में छोटी है लेकिन इसकी शरीर की कद काठी छोटे होते हैं।
  • इसके सींग छोटे होते हैं और पैर छोटे होते हैं।
  • एक वयस्क नर बकरी का वजन लगभग 25 से 30 किग्रा और मादा का वजन 20 से 25 किग्रा होता है। यह दूध उत्पादन के लिए अनुपयोगी है।
  • छोटे होने के कारण अव्यवसायी के साथ साथ आम उपभोक्ता भी खरीद लेते हैं, इसके मांस प्रोटीन युक्त एवं कम फाइबर होने के कारण लोनों का पहला पसंद है।
  • अनुवांशिक गुणबत्ता के कारण  ब्लैक बंगाल की रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है, और कई गंभीर बीमारी के प्रति रेसिस्टेंस है, और मेडिकल खर्च को कम कर देती है । आसानी से वातावरण में ढल जातें है।
  • अधिकांश अन्य नस्लों की तुलना में ब्लैक बंगाल बकरियां पहले की उम्र में यौन परिपक्वता प्राप्त करती हैं।
  • मादा बकरी साल में दो बार गर्भवती होती है और एक से तीन बच्चों को जन्म देती है। कम समय में हीं बिक्री के लिए तैयार हो जाती है।